GAZAL
Thursday, 16 March 2017
गुंचाए शौक लगा है खिलने
फिर तुझे याद किया है दिल ने।
दास्ताने लैब-ए -आलम पर
हम तो चुपचाप गए थे मिलने।
मैंने छूपकर तेरी बाते थी
जानें कब जान लिया महफ़िल ने।
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