Thursday, 16 March 2017

GAZAL




क़साब बनकर मिलोगे तो क्या हिसाब दूंगा
महब्बतो का महब्बतों से जवाब दूंगा-----
तुम्हारी खातिर ज़रूर इतना करूँगा लेकिन
खुशामदीं के दो बोल कहकर गुलाब दूंगा----
खुदा नही मै के पल में दिल को बदल के रख दू
हा उनको तोहफ़े में इश्क़ की इक किताब दूंगा---
नसीहतों का अभी ज़माना रहा कहा है
अभी तो अहलेसुखन का उनको ख़िताब दूंगा----
अभी जरासा है होश बाकी खुदी का साकी
ये वादा कर दे के बेखुदीतक शराब दूंगा-----
वो इतना खुलकर हरेक पर्दा हटा रहे है
के सोचता हूँ जरासा उनको हिजाब दूंगा----
ख़याल में तो उन्ही की खुश्बू ख़लिश बसी है
मै अपने लहज़े का थोड़ा उनमे शबाब दूंगा----
ख़लिश-------

GAZAL




" वो कहर ढाया तेरी अंगडाइने
शर्म से पानी हुए खुद आईने"
" ढल गई वो आप ही तस्वीर में
यूं ही कागज़ पर खिंची थी लाइनें"
" कम समझकर पाँव पानी में रखा
दे दिया धोका हमे गहराई ने"
" नेकनामी को समझते थे भला
तोड़ डाला वो भरम रुस्वाइने"
"उम्रभर बस हम ग़ज़ल कहते गए
उम्रभर पीछा किया परछाइने'
हा ख़लिश सस्ते में हमको ले लिया
सोच की बढ़ती हुई महंगाइने"
ख़लिश------




गुंचाए शौक लगा है खिलने 
फिर तुझे याद किया है दिल ने।

दास्ताने लैब-ए -आलम पर 
हम तो चुपचाप गए थे मिलने। 

मैंने छूपकर तेरी बाते थी 
जानें कब जान लिया महफ़िल ने।  

Monday, 6 March 2017



आंख ठहरी हुई है-----
है मुनासिब ये जुमला सफ़र के लिए
घर से बाहिर मै निकला हूं घर के लिए-----
चारसू कोहरा है ग़रज़ का रवां
दो क़दम भी है मुश्किल बशर के लिए-------
ख़ूनेदिल मांगती है नफ़स-दर-नफ़स
शेर मुश्किल सी शै है जिग़र के लिए--------
लफ्ज़ ख़ुद इंतिखाबेग़ज़ल हो गए
आप ठहरे हुए है बहर के लिए------
है तो आंखों की ज़द मे नज़ारें बहुत
आंख ठहरी हुई है नज़र के लिए-------
हमने सोचा न था दिल मे उठ जाएगी
हमने चाही दिवारें थी घर के लिए-----
इक ख़लिश हासिलेज़िन्दगी हो गई
इक ख़ुशी मिल गई उम्रभर के लिए-------
ख़लिश----------------



मुस्कुराना रिवाज़ क्यों कर है-----
हरतरफ़ एतिराज़ क्यों कर है
सुर से नाख़ुश ये साज़ क्यों कर है-----
बज़्म सारी उदास बैठी है
ये क़यामत रियाज़ क्यों कर है-----
बस के चुप है तो चुप ही रहने दो
ये न पूछो लिहाज़ क्यों कर है-----
दिल को जानोगे दिल से जानो तो
हमको दिलपर यूं नाज़ क्यों कर है-----
हर ख़ुशी सूखकर हुई कांटा
एक बस ग़म गुदाज़ क्यों कर है------
इस पे क्या दे जवाबेअश्क़ ख़लिश
मुस्कुराना रिवाज़ क्यों कर है-----
ख़लिश----------------
गुदाज़---मांसल,(इथे ताज़ातवाना असा घेतला आहे)