Monday, 7 November 2016

नसीब आजमाने के दिन आ रहे हैं 
क़रीब उनके आने के दिन आ रहे है 
टपकने लगी उन निगाहों से मस्ती 
निगाहे चुराने के दिन आ रहे है।
कलाम - फैज़  अहमद फैज फैज 
गायक- बुद्धरत्न लिहीतकर 

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