GAZAL
Monday, 7 November 2016
नसीब आजमाने के दिन आ रहे हैं
क़रीब उनके आने के दिन आ रहे है
टपकने लगी उन निगाहों से मस्ती
निगाहे चुराने के दिन आ रहे है।
कलाम - फैज़ अहमद फैज फैज
गायक- बुद्धरत्न लिहीतकर
https://www.youtube.com/watch?v=XjKVDGTur_g
No comments:
Post a Comment
Newer Post
Home
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
No comments:
Post a Comment